Tuesday 23rd Jul 2024
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WHO के खराब निर्णयों की वजह से यह महामारी काफी महंगी साबित हुई-स्वतंत्र ग्लोबल पैनल

WHO के खराब निर्णयों की वजह से यह महामारी काफी महंगी साबित हुई-स्वतंत्र ग्लोबल पैनल

कोरोना संक्रमण के दूसरे लहर का तांडव पूरी दुनिया में देखा जा रहा है। जिसे लेकर स्वतंत्र ग्लोबल पैनल ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट में कहा कि महामारी के भयानक स्थिति को रोका जा सकता था लेकिन जानलेवा कोरोना संक्रमण और उसके साथ खराब समन्वय की वजह से चेतावनी के संकेत को अनसुना कर दिया गया था। द इंडिपेंडेंट पैनल फॉर पैन्डेमिक प्रीपेयर्डनेस एंड रिस्पाॅन्स (आईपीपीपीआर) ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और पहले महामारी को लेकर सतर्क कर सकता था लेकिन एक के बाद एक खराब निर्णय की वजह से संक्रमण ने अब तक करीब 33 लाख लोगों की जान ले ली है और विश्व अर्थव्यवस्था को भी हिला कर रख दिया है।

आईपीपीपीआर ने अपनी बहुप्रतीक्षित अंतिम प्रतिवेदन में कहा कि संस्थाएं लोगों की सुरक्षा में असफल रही और विज्ञान को इनकार करने वाले नेताओं ने स्वास्थ्य हस्तक्षेप में जनता के विश्वास को मिटा दिया है। कोरोना के प्रारंभिक प्रक्रिया में तत्क्षण की कमी थी इसके बाद अनदेखी की वजह से यह काफी महंगी साबित हुई। पैनल ने अपनी रिपोर्ट में दुनिया के सबसे धनी राष्ट्रो से अगली महामारी की तैयारी के लिए समर्पित नए संगठनों को आर्थिक मदद करने की बात कही है। इस पैनल की साझा नेतृत्व न्यूजीलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री, लाइबेरिया के पूर्व राष्ट्रपति और नोबेल विजेता एलन जाॅनसन सरलीमफ ने की है।

पैनल ने डब्ल्यूएचओ पर निशाना साधते हुए कहा कि संगठन 22 जनवरी 2020 की स्थिति को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय मामले के तहत सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर सकता था। लेकिन बजाय उसके ऐसा करने के लिए 8 दिनों की प्रतीक्षा की। डब्ल्यूएचओ ने पिछले साल मार्च महीने में इसे महामारी करार दिया था। इसके साथ ही पैनल ने कहा कि चीन ने तो अपनी तरफ से देर की थी लेकिन हर ओर से इस मामले में देर हुई है। वर्तमान में इस मामले को लेकर रिपोर्ट में कई उपायों का जिक्र किया गया है जिसमें प्रमुख तौर पर जल्द से जल्द टीकाकरण की बात कही गई है।